यमुना एक्सप्रेसवे हादसा कोहरा बाना हादसे का वजह एक छोटी गलती से 19 मौतें, बसें जलीं, DNA से पहचान
यमुना एक्सप्रेसवे हादसा कोहरा बाना हादसे का वजह एक छोटी गलती से 19 मौतें, बसें जलीं, DNA से पहचान
उत्तर प्रदेश के मथुरा में यमुना एक्सप्रेसवे हादसा देश के सबसे भयावह सड़क हादसों में से एक बन गया है। कोहरे की चादर, तेज रफ्तार और एक छोटी सी चूक ने ऐसा कहर बरपाया कि देखते ही देखते बसें आग के गोले में बदल गईं। इस दर्दनाक दुर्घटना में अब तक 18 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हैं।
घटना दिल्ली–आगरा यमुना एक्सप्रेसवे की है, जहां देर रात घने कोहरे के बीच कई वाहन आपस में टकरा गए। टक्कर इतनी भीषण थी कि कुछ बसों में तुरंत आग लग गई और यात्रियों को निकलने का मौका तक नहीं मिला।
कैसे हुआ यमुना एक्सप्रेसवे हादसा?
प्रारंभिक जांच के अनुसार, हादसा उस वक्त हुआ जब एक्सप्रेसवे पर दृश्यता बेहद कम थी। घना कोहरा छाया हुआ था और कई वाहन तेज गति में थे। एक बस अचानक सामने चल रहे वाहन से टकरा गई, जिसके बाद पीछे से आ रही अन्य बसें और गाड़ियां भी उसमें जा भिड़ीं।
कुछ ही पलों में 8 से 10 वाहन आपस में फंस गए। टक्कर के बाद डीजल टैंक फटने से आग भड़क उठी और देखते ही देखते बसें जलकर खाक हो गईं।
आग ने छीना बचने का मौका
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आग इतनी तेजी से फैली कि यात्रियों को बाहर निकलने का समय ही नहीं मिला। कई लोग सीटों पर ही फंसे रह गए। चीख-पुकार मच गई, लेकिन घने धुएं और लपटों के बीच किसी की मदद करना मुश्किल हो गया।
फायर ब्रिगेड और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।
मौत का आंकड़ा बढ़कर 18
शुरुआत में प्रशासन ने 13 मौतों की पुष्टि की थी, लेकिन बाद में अस्पताल और रेस्क्यू रिपोर्ट के आधार पर यह आंकड़ा बढ़कर 18 हो गया। कई शव इस कदर जल चुके हैं कि उनकी पहचान संभव नहीं हो पा रही है।
ऐसे मामलों में अब DNA टेस्ट के जरिए मृतकों की पहचान की जा रही है। प्रशासन ने परिजनों से DNA सैंपल देने की अपील की है।
DNA टेस्ट से पहचान की चुनौती
हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कुछ शव पूरी तरह जल चुके हैं। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने मिलकर DNA जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है ताकि पीड़ित परिवारों को सही जानकारी दी जा सके।
अधिकारियों के अनुसार, DNA रिपोर्ट आने में कुछ दिन लग सकते हैं। तब तक शवों को सुरक्षित रखा गया है।
कोहरा या लापरवाही – किसकी गलती?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस भीषण दुर्घटना का जिम्मेदार कौन है?
जांच में सामने आया है कि:
- घना कोहरा और कम दृश्यता
- निर्धारित सीमा से अधिक रफ्तार
- एक्सप्रेसवे पर पर्याप्त चेतावनी व्यवस्था की कमी
- वाहनों के बीच सुरक्षित दूरी का पालन न होना
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर रफ्तार नियंत्रित होती और कोहरे में सावधानी बरती जाती, तो शायद इतना बड़ा हादसा टल सकता था।
रेस्क्यू ऑपरेशन: जंग वक्त से
हादसे के तुरंत बाद पुलिस, दमकल विभाग, एंबुलेंस और NHAI की टीमें मौके पर पहुंचीं। कई घंटों तक रेस्क्यू ऑपरेशन चला। जली हुई बसों को काटकर लोगों को बाहर निकाला गया।
घायलों को मथुरा और आगरा के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां कुछ की हालत अभी भी गंभीर बताई जा रही है।
प्रशासन और सरकार की प्रतिक्रिया
उत्तर प्रदेश सरकार ने हादसे पर गहरा दुख जताया है। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने की घोषणा की है और घायलों के इलाज का पूरा खर्च सरकार द्वारा उठाने की बात कही है।
साथ ही, हादसे की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं।
यमुना एक्सप्रेसवे पर पहले भी हो चुके हैं हादसे
यह पहली बार नहीं है जब यमुना एक्सप्रेसवे पर इतना बड़ा हादसा हुआ हो। कोहरा, तेज रफ्तार और लंबा सीधा रास्ता इस एक्सप्रेसवे को खतरनाक बना देता है। हर साल सर्दियों में यहां कई गंभीर दुर्घटनाएं होती हैं।
क्या सीखा जा सकता है इस हादसे से?
यह हादसा एक बार फिर याद दिलाता है कि:
- कोहरे में गति कम रखना जरूरी है
- एक्सप्रेसवे पर भी सतर्कता अनिवार्य है
- सरकार को बेहतर चेतावनी और निगरानी सिस्टम लगाने चाहिए
निष्कर्ष
मथुरा यमुना एक्सप्रेसवे हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। एक छोटी सी गलती ने कई घरों को उजाड़ दिया। अब जरूरत है कि प्रशासन और आम लोग दोनों सबक लें, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी दोबारा न हो।

Post a Comment